CIPET Full Form

सिपेट (CIPET) का फ़ुल फ़ॉर्म सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (Central Institute of Plastic Engineering and Technology) होता है।

सिपेट भारत सरकार की तरफ से चलाए जाने वाला एक टेक्निकल इंस्टिट्यूट है जिसकी स्थापना प्लास्टिक के फील्ड में स्टूडेंट्स को टेक्निकल नॉलेज देने के लिए की गई थी

देश के लगभग सभी राज्य में सिपेट का एक या दो ब्रांच चल रहा है जिस के थ्रू वहां के लोकल और बाहर के स्टूडेंट्स को भी प्लास्टिक से जुड़े अलग-अलग तरह के कोर्स कराए जाते हैं।

सिपेट का हेड ऑफिस guindy चेन्नई में है और इसके ब्रांच पूरे देश में फैले हैं।

लोगों को टेक्निकल और स्किल एजुकेशन देने के लिए स्थापित किया गया यह इंस्टिट्यूट आज बहुत काम का साबित हो रहा है।

यह इन्स्टिटूट भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ़ केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल्स के अंतर्गत आता है, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ केमिकल एंड फर्टीलिज़ेर्स के अंर्तगत काम करता है.

जैसा कि आप देख सकते हैं आज हमारे लाइफ में प्लास्टिक का कितना यूज होता है और हर दिन यह बढ़ता ही जा रहा है, इसलिए सिपेट से कोर्स करने वाले अधिकतर बच्चों का प्लेसमेंट अच्छे कंपनीज में हो जाता है।

CIPET Meaning

नॉर्थ इंडिया में अक्सर लोग डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी कोर्स को ही सिपेट बुलाते हैं, जो कि सही नहीं है सिपेट भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा है एक इंस्टिट्यूट या कॉलेज का नाम है जबकि डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी उसके अंदर चलाया जाने वाला एक कोर्स है

अगर आपका भी इंटरेस्ट प्लास्टिक से रिलेटेड कोई भी कोर्स में है तो आपको सिपेट के बारे में सब कुछ जरूर जाना चाहिए।

सीपेट (CIPET) के अंदर कौन-कौन से कोर्स होते हैं?

  • DIPLOMA ( डिप्लोमा)
  • ENGINEERING (इंजीनियरिंग )
  • MASTERS (मास्टर्स )

CIPET में एडमिशन का प्रक्रिया क्या है?

सिपेट में एडमिशन के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम लिखना होता है, अलग-अलग कोर्सेज के लिए अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम होता है जैसे कि डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के लिए अलग से इंट्रेंस एग्जाम होगा और इंजीनियरिंग इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के लिए अलग से एग्जाम होगा।

जैसा कि आपको बताया जा चुका है CIPET के अंतर्गत बहुत तरह के कोर्स होते हैं हर कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया अलग अलग होता है जैसे अगर आप डिप्लोमा (Diploma in Plastic technology)करना चाहते हैं तो आपका 10th पास होना जरूरी है।

वैसे ही अगर आप इंजीनियरिंग (Plastic Engineering) करना चाहते हैं तो आपको 12th पास होना और उसमें एक अच्छा परसेंटेज होना जरूरी है।

लेकिन स्किल डेवलपमेंट का बहुत सारा कोर्स आठवीं पास युवाओं के लिए भी अवेलेबल है जिसमें आठवीं तक पढ़ा कोई भी स्टूडेंट सीधे जॉइन कर सकता है।

कुल कितने cipet इंस्टिट्यूट हैं इंडिया में?

अभी इंडिया में कुल 32 सिपेट कॉलेज हैं जिनका डिटेल नीचे दिया गया है-

  • सिपेट चेन्नई
  • सिपेट हैदराबाद
  • सिपेट अमृतसर
  • सिपेट इम्फाल
  • सिपेट भोपाल
  • सिपेट मैसूरु
  • सिपेट हाजीपुर
  • सिपेट गुवाहाटी
  • सिपेट हल्दीआ
  • सिपेट भुबनेश्वर
  • सिपेट औरंगाबाद
  • सिपेट जयपुर
  • सिपेट मुरथल
  • सिपेट मदुरै
  • सिपेट बालासोर
  • सिपेट वीजेवाड़ा
  • सिपेट वलसाड
  • सिपेट बड्डी
  • सिपेट ग्वालियर
  • सिपेट चंद्रपुर
  • सिपेट रांची
  • सिपेट अगरतला
  • सिपेट देहरादून
  • सिपेट कोबरा  

सिपेट से कोर्स करने के बाद कैसा नौकरी मिलेगा-

सिपेट से अलग-अलग तरह के कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स का अलग-अलग फील्ड में प्लेसमेंट होता है, अधिकतर बच्चों का प्लेसमेंट प्लास्टिक से रिलेटेड कोई ना कोई कंपनी में हो जाता है

लेकिन इसके अलावा भी बहुत सारे स्टूडेंट्स मैन्युफैक्चरिंग के फील्ड में, इलेक्ट्रिकल फील्ड में और दूसरे फील्ड्स में जॉब पाते हैं

आपका शुरुआती सैलरी इस बात पर डिपेंड करता है कि आपने कौन सा कोर्स किया है अगर आपने डिप्लोमा कोर्स किया है तो आपको ₹10000 तक शुरुआत में मिल सकता है और अगर आपने इंजीनियरिंग किया है तो आपको 25 से ₹30000 तक शुरुआत में मिल सकता है

सिपेट का इंडिया के लिए योगदान-

सिपेट इंस्टीट्यूट ने इंडिया के स्किल डेवलपमेंट के सपने और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के उम्मीद को मदद दिया है

प्लास्टिक की फील्ड होने वाले अधिकतर रिसर्च सिपेट के द्वारा ही हुआ है

जैसे कि अभी जब प्लास्टिक से इन्वायरमेंट को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है तो यह रिसर्च किया जाना कि कौन सा प्लास्टिक इनफॉर्मेंट के लिए कम नुकसानदायक होगा सब का आकलन इसी इंस्टिट्यूट के द्वारा किया जा रहा है