Dard Bhari Shayari

 Dard Bhari Shayari

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Dard bhari Shayari

बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी, बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी, मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ, खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।

जो मेरा था वो मेरा हो नहीं पाया, आँखों में आंसू भरे थे पर मैं रो नहीं पाया, एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि, हम मिलेंगे ख़्वाबों में पर मेरी बदकिस्मती तो देखिये, उस रात तो मैं ख़ुशी के मारे सो भी नहीं पाया।

वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे, हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे, और हमें बेवफ़ा का नाम मिला, क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।

कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं, इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं, झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी, इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।

आज फिर तेरी याद आयी बारिश को देख कर, दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देख कर, रोये इस कदर तेरी याद में, कि बारिश भी थम गयी मेरी बारिश को देख कर।

इस दिल की दास्ताँ भी बड़ी अजीब होती है, बड़ी मुस्किल से इसे ख़ुशी नसीब होती है, किसी के पास आने पर ख़ुशी हो न हो, पर दूर जाने पर बड़ी तकलीफ होती है।

बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की, कोई किसी को टूट कर चाहता है, और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।

मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है, हम तन्हाई में बैठे रोते हैं, लोगों ने हमें महफ़िल में हँसते देखा है

हर बात में आंसू बहाया नहीं करते, दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते, लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है, दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।

हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है, हर पल तुझसे मिलने की प्यास रहती है, सब कुछ है यहाँ बस तू नही, इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है।

वक्त नूर को बेनूर कर देता है, छोटे से जख्म को नासूर कर देता है, कौन चाहता है अपनों से दूर होना, लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।

😢 Dard Bhari Shayari 😢

दर्द दे गए सितम भी दे गए, ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए, दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का, और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।

अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे, तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे, ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको, सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।

कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का, वो क्या समझे दर्द आंखों की इस नमी का, उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं अब कि, उन्हे अब एहसास ही नहीं हमारी कमी का।

जिंदगी भर दर्द से जीते रहे, दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे, कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे, पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।

दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना, अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना, कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं, फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना।

हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने, तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने, तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला, बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।

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